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द किंग्स स्कूल कैंटरबरी ने बेंगलुरु में की शुरुआत, 1,400 साल की विरासत में जुड़ा नया अध्याय

बेंगलुरु: दुनिया के सबसे पुराने स्कूलों में से एक, द किंग्स स्कूल कैंटरबरी ने आज बेंगलुरु के फोर सीजन्स होटल में आयोजित एक कार्यक्रम में द किंग्स स्कूल कैंटरबरी, बेंगलुरु की शुरुआत की।
597 ईस्वी में स्थापित द किंग्स स्कूल कैंटरबरी के पास 1,400 वर्षों से अधिक की समृद्ध शैक्षणिक विरासत है। नया स्कूल इस ऐतिहासिक विरासत, लंबे शैक्षणिक अनुभव और किंग्स की विशिष्ट शिक्षा पद्धति को बेंगलुरु की संस्कृति, ऊर्जा और स्थानीय परिवेश के साथ जोड़ेगा। यह साझेदारी किंग्स कैंटरबरी के शैक्षणिक मूल्यों और शिक्षा के दृष्टिकोण को विद्याशिल्प एजुकेशन ग्रुप की शैक्षणिक विशेषज्ञता, स्थानीय अनुभव और बेंगलुरु में शिक्षा के प्रति लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता के साथ जोड़ती है।
स्कूल अपने पहले विद्यार्थियों का स्वागत शैक्षणिक सत्र 2027-28 में करेगा। इसके साथ किंग्स की लंबी शैक्षणिक यात्रा में एक नया अध्याय शुरू होगा और भारत के सबसे गतिशील शहरों में से एक बेंगलुरु में बच्चों को विशिष्ट किंग्स शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
इस साझेदारी पर विद्याशिल्प एजुकेशन ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. किरण पई ने कहा, “द किंग्स स्कूल कैंटरबरी की 1,400 वर्षों से अधिक की असाधारण विरासत है और इस विरासत को बेंगलुरु लाना एक रोमांचक नए अध्याय की शुरुआत है। हम ऐसी साझेदारी चाहते थे, जिसमें मूल स्कूल यहां शिक्षा की रूपरेखा तैयार करने और उसे लागू करने में सक्रिय भूमिका निभाए तथा पूरे संस्थान में उच्च शैक्षणिक मानकों को सुनिश्चित किया जाए। हम मिलकर विद्यार्थियों के लिए वास्तव में वैश्विक किंग्स नेटवर्क का हिस्सा बनने के अवसर तैयार कर रहे हैं, जो उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय समुदाय और प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों की विरासत से जोड़ेगा।
इस अवसर पर यूनाइटेड किंगडम और भारत के बीच शैक्षणिक सहयोग के महत्व के साथ-साथ शिक्षा, नवाचार और अवसरों के अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में बेंगलुरु की बढ़ती भूमिका पर भी चर्चा की गई।
ब्रिटिश डिप्टी हाई कमीशन, बेंगलुरु के डिप्टी हेड ऑफ मिशन ओवेन रिचर्ड्स ने कहा, “द किंग्स स्कूल कैंटरबरी सही समय पर, सही देश और सही राज्य में आया है। भारत की विशाल मानव क्षमता और ज्ञान प्राप्त करने की मजबूत इच्छा इसे शैक्षणिक सहयोग के लिए एक स्वाभाविक भागीदार बनाती है। जैसे-जैसे ब्रिटेन और भारत शिक्षा के क्षेत्र में अपनी साझेदारी को मजबूत कर रहे हैं, किंग्स जैसे संस्थान वैश्विक प्रतिभाओं की अगली पीढ़ी को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मुझे विश्वास है कि यह स्कूल अपने विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच, ईमानदारी, दृढ़ता, जिज्ञासा और ज्ञान जैसे गुण विकसित करेगा, जिससे वे तेजी से जटिल होती दुनिया में बेहतर तरीके से आगे बढ़ सकेंगे। इस लॉन्च कार्यक्रम में द किंग्स स्कूल कैंटरबरी और विद्याशिल्प एजुकेशन ग्रुप के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ शिक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रमुख लोग, गणमान्य व्यक्ति, संस्थापक साझेदार और बेंगलुरु समुदाय के सदस्य शामिल हुए। इस अवसर पर ब्रिटिश डिप्टी हाई कमीशन, बेंगलुरु के डिप्टी हेड ऑफ मिशन ओवेन रिचर्ड्स और मिनर्वा इंटरनेशनल एजुकेशन लिमिटेड के सीईओ टोनी पुरी भी उपस्थित रहे। इस साझेदारी को औपचारिक रूप देते हुए विद्याशिल्प एजुकेशन ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. किरण पई और द किंग्स स्कूल कैंटरबरी इंटरनेशनल की मैनेजिंग डायरेक्टर नीना हंट ने दोनों संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की उपस्थिति में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

इसके बाद द किंग्स स्कूल कैंटरबरी, बेंगलुरु की फाउंडिंग हेड ऑफ प्रेप ली होम्स-हिल ने बेंगलुरु स्कूल का परिचय दिया। उन्होंने स्कूल के शैक्षणिक दृष्टिकोण को साझा किया और रेंडर की गई फिल्मों एवं तस्वीरों के माध्यम से प्रस्तावित कैंपस की पहली विस्तृत झलक प्रस्तुत की।
द किंग्स स्कूल कैंटरबरी, बेंगलुरु शैक्षणिक सत्र 2027-28 में नर्सरी, रिसेप्शन, ईयर 1 और ईयर 2 के साथ शुरू होगा और इसमें तीन वर्ष की आयु से बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा। शुरुआती विद्यार्थी जैसे-जैसे आगे की कक्षाओं में बढ़ेंगे, स्कूल में नए ईयर ग्रुप भी चरणबद्ध तरीके से जोड़े जाएंगे। भविष्य में बेंगलुरु कैंपस को एक पूर्ण स्कूल के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे बच्चे स्कूल के विस्तार के साथ किंग्स समुदाय के भीतर अपनी शिक्षा जारी रख सकें।
चरणबद्ध तरीके से स्कूल का विस्तार करने से इसकी संस्कृति, परंपराओं और शैक्षणिक मानकों को शुरुआती विद्यार्थियों और उनके परिवारों के साथ व्यवस्थित रूप से विकसित करने में मदद मिलेगी। द किंग्स स्कूल कैंटरबरी की विरासत और लंबे शैक्षणिक अनुभव से प्रेरणा लेते हुए भी बेंगलुरु स्कूल केवल कैंटरबरी के मॉडल को दूसरे स्थान पर दोहराने तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें किंग्स की विशिष्ट पहचान स्पष्ट रूप से दिखाई देगी, साथ ही इसकी शिक्षा और संस्कृति पर बेंगलुरु, यहां के बच्चों और परिवारों की भी स्पष्ट छाप होगी।
इस तरह यह लॉन्च केवल एक नए स्कूल की शुरुआत नहीं है, बल्कि उस शैक्षणिक यात्रा के एक नए अध्याय की शुरुआत है, जो चौदह सदियों से भी पहले कैंटरबरी में शुरू हुई थी।
जब 2027 में स्कूल के पहले विद्यार्थी यहां कदम रखेंगे, तो वे बेंगलुरु में इस नई यात्रा की शुरुआत से ही इसका हिस्सा बनेंगे। वे स्कूल की उस संस्कृति, परंपराओं और समुदाय को आकार देने में योगदान देंगे, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए इसकी पहचान बनेगी।

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