उत्तराखंड

वर्षों के इंतजार के बाद भी सड़क नहीं बनी तो ग्रामीणों ने खुद शुरू की कटिंग

वर्षों से सड़क निर्माण की मांग पूरी नहीं होने से नाराज सकंड गांव के ग्रामीणों ने अब खुद ही सड़क बनाने का बीड़ा उठाया है। प्रशासनिक उपेक्षा और लगातार मिल रहे आश्वासनों से तंग ग्रामीणों ने शुक्रवार को कुवाणा धार में सामूहिक श्रमदान कर सड़क की कटिंग शुरू कर दी। पहले दिन ग्रामीणों ने करीब 12 मीटर लंबी और चार मीटर चौड़ी सड़क की कटिंग की।

पूजा-अर्चना के बाद शुरू किया श्रमदान

शुक्रवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे 20 से अधिक ग्रामीण कुवाणा धार में एकत्र हुए। पूजा-अर्चना के बाद ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के लिए फावड़ा और सबल उठाया। वीरेंद्र सिंह बिष्ट, रघुवीर सिंह बिष्ट, लखमा देवी, दाताराम देवली और उषा देवी समेत अन्य ग्रामीणों ने श्रमदान किया। ग्रामीणों का कहना है कि गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए लंबे समय से मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

तकनीकी आपत्तियों के चलते अटकी सड़क

ग्रामीणों के अनुसार, गांव तक सड़क पहुंचाने का प्रस्ताव कई बार शासन को भेजा गया, लेकिन तकनीकी आपत्तियों के चलते मामला आगे नहीं बढ़ सका। ग्रामीणों ने 31 अगस्त को जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर 10 दिन में कार्रवाई की मांग की थी। समय सीमा पूरी होने के बाद भी सुनवाई नहीं होने पर ग्रामीणों ने खुद सड़क निर्माण शुरू करने का निर्णय लिया।

बीमारों और स्कूली बच्चों को होती है परेशानी

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क सुविधा नहीं होने से बीमारों, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को आवाजाही में परेशानी होती है। आपात स्थिति में मरीजों को मुख्य सड़क तक पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने से गांव के लोगों को आवागमन में राहत मिलेगी।

लोनिवि ने शासन को भेजा है एस्टीमेट

लोक निर्माण विभाग गौचर के अधिशासी अभियंता सुनील कुमार ने बताया कि सड़क के प्रथम चरण के सर्वे का एस्टीमेट शासन को भेजा गया है। वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से आश्वासन सुनते आ रहे हैं और अब सड़क निर्माण के लिए खुद श्रमदान कर रहे हैं।

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