उत्तराखंड

भागीरथी इको सेंसेटिव जोन: निगरानी और सख्त होगी, नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई।

भागीरथी इको सेंसेटिव जोन (बीईएसजेड) में अब निगरानी व्यवस्था और सख्त की जाएगी तथा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई तेज होगी। दिल्ली में शनिवार को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की बैठक में इस पर विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव, राज्य के मुख्य सचिव आनंद वर्धन सहित मंत्रालय और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि बीईएसजेड अधिसूचना के प्रावधानों को पूरी तरह प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक सुदृढ़ संस्थागत तंत्र विकसित किया जाए, जो निगरानी का काम भी संभाल सके। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने पर सहमति बनी कि स्थानीय निवासियों को अधिक से अधिक सुविधाएं मिलें।

बैठक के बाद केंद्रीय वन मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिये कहा कि अधिसूचना के सभी प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। अधिकारियों ने इसके लिए एक मजबूत संस्थागत ढांचा तैयार करने और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूर्ण अनुपालन कराने पर भी बल दिया, विशेष रूप से भागीरथी नदी तथा आसपास के क्षेत्रों के सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और आध्यात्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए।

2020 में तैयार हुआ था जोनल मास्टर प्लान

गौरतलब है कि बीईएसजेड का जोनल मास्टर प्लान वर्ष 2020 में तैयार किया गया था, जिसमें 12 अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं। बैठक में शामिल अधिकारियों के अनुसार अब इसे और मजबूती से लागू करने पर काम होगा। साथ ही नियमों के क्रियान्वयन के साथ-साथ स्थानीय लोगों को सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे। बता दें कि बीईएसजेड करीब चार हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है, जहां गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उच्च स्तरीय और जिला स्तरीय, दो निगरानी समितियां कार्यरत हैं।

अवैध निर्माण का मामला भी उठा

बैठक में भागीरथी इको सेंसेटिव जोन में अवैध निर्माण के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। इस संबंध में मंत्रालय ने पहले राज्य सरकार को पत्र लिखकर अवैध निर्माण का उल्लेख किया था, जिसके बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी थी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button