ऊपरी गंगनहर की वार्षिक मरम्मत के चलते मंगलवार मध्य रात्रि से नहर को बंद कर दिया गया है। इससे हरकी पैड़ी पर गंगा जल की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका है। नहर में सात नवंबर की मध्य रात्रि से दोबारा पानी छोड़े जाने की योजना है। ऐसे में मरम्मत अवधि के दौरान हरकी पैड़ी पर गंगा स्नान के लिए जल उपलब्ध कराने की चुनौती रहेगी।
हरिद्वार में हरकी पैड़ी पर गंगा स्नान के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही से स्थानीय व्यापारियों का कारोबार भी चलता है। नहर बंद होने से श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आने की आशंका है, जिसका असर होटल, धर्मशालाओं, दुकानदारों और अन्य कारोबारियों पर पड़ सकता है।
व्यापारी त्योहारों के मौसम में गंगनहर बंद किए जाने का विरोध करते रहे हैं। उनका कहना है कि इस अवधि में श्रद्धालुओं की आवाजाही और कारोबार प्रभावित होता है। इसके बावजूद वार्षिक मरम्मत के लिए नहर बंद की जाती है।
किसानों की सिंचाई भी होगी प्रभावित
ऊपरी गंगनहर बंद होने का असर उत्तर प्रदेश के किसानों पर भी पड़ेगा। उत्तराखंड से होकर उत्तर प्रदेश जाने वाली इस नहर के पानी पर बड़ी संख्या में किसान सिंचाई के लिए निर्भर हैं। जल प्रवाह रुकने से खेतों तक पानी पहुंचाने में परेशानी हो सकती है।
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के एसडीओ भारत भूषण ने बताया कि नहर बंदी के दौरान हरकी पैड़ी तक गंगा स्नान के लिए पानी पहुंचाने की व्यवस्था से जुड़े कार्य भी किए जाएंगे। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को स्नान के लिए जल उपलब्ध कराना है।
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