चारधाम यात्रा को और अधिक सुरक्षित व व्यवस्थित बनाने के लिए इस बार पहली बार अत्याधुनिक नभ नेत्र ड्रोन की तैनाती की जा रही है। करीब डेढ़ करोड़ रुपये कीमत वाला यह हाई-टेक ड्रोन पांच किमी के दायरे तक उड़ान भरकर हाई-रिजाल्यूशन कैमरों के माध्यम से श्रद्धालुओं की निगरानी करेगा। इसकी शुरुआत आगामी कांवड़ मेले से की जाएगी, जहां भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था में इसका उपयोग होगा।
लाइव निगरानी से आसान होगा भीड़ प्रबंधन
नभ नेत्र ड्रोन यात्रा के दौरान प्रत्येक दिन के पीक आवर्स में श्रद्धालुओं की गतिविधियों की लाइव तस्वीरें और वीडियो एसडीआरएफ मुख्यालय तथा चारधाम यात्रा कंट्रोल रूम तक पहुंचाएगा। इससे कंट्रोल रूम में बैठे अधिकारी भीड़ की स्थिति पर लगातार नजर रख सकेंगे और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर सकेंगे। किसी भी आपदा या आपात स्थिति में यह ड्रोन घटनास्थल की वास्तविक और लाइव तस्वीरें उपलब्ध कराएगा।
इससे रेस्क्यू टीमों को स्थिति का सटीक आकलन करने और राहत एवं बचाव कार्यों की रणनीति तय करने में मदद मिलेगी। एसडीआरएफ के कमांडेंट अर्पण यदुवंशी ने बताया कि अत्याधुनिक नभ नेत्र ड्रोन का संचालन आगामी कांवड़ मेले से शुरू किया जाएगा। इसके माध्यम से भीड़ नियंत्रण, निगरानी, आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। अधिक प्रभावी बनाने के लिए एआइ से भी जोड़ा गया है जिससे त्वरित अलर्ट मिल सके।
कंट्रोल वैन से होगा संचालन
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) द्वारा एसडीआरएफ को उपलब्ध कराए गए इस ड्रोन के साथ एक अत्याधुनिक कंट्रोल वैन भी तैनात रहेगी। इसी वैन के माध्यम से ड्रोन का संचालन किया जाएगा तथा लाइव वीडियो और फोटो मुख्यालय एवं चारधाम यात्रा कंट्रोल रूम तक भेजे जाएंगे।
चारधाम मार्ग पर तैनात हैं विशेष एसडीआरएफ पोस्ट
प्रदेशभर में एसडीआरएफ की 42 प्रशिक्षित पोस्ट कार्यरत हैं। इनमें से चार अतिरिक्त पोस्ट बढ़ाकर कुल 10 पोस्टों को विशेष रूप से हरिद्वार की हर की पौड़ी से लेकर चारों धामों के यात्रा मार्गों पर तैनात किया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
हर जवान की जेब में होंगी पांच जीवन रक्षक दवाएं
चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य सुरक्षा को देखते हुए ड्यूटी पर तैनात प्रत्येक एसडीआरएफ जवान को विशेष फर्स्ट एड किट उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें सोर्बिट्रेट, पैरासिटामोल, डायमाक्स, इकोस्प्रिन और ओमेप्राजोल जैसी पांच आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं रहेंगी। किसी श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ने पर जवान प्राथमिक उपचार देने के साथ उसे तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाने में सहायता करेंगे।




