उत्तराखंड

Rishikesh: अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का आगाज, 80 देशों के करीब 1500 से अधिक योग जिज्ञासु और योगाचार्य पहुंचे

परमार्थ निकेतन में सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का विधिवत आगाज हो गया। महोत्सव में 80 से अधिक देशों के 1500 योग साधक और योग जिज्ञासु शामिल हुए हैं।

महोत्सव के पहले दिन गंगा आरती के दौरान योग साधकों ने संगीत, योग, मल्लखंब के अनोखे संगम का भरपूर आनंद लिया। प्रातः काल से लेकर सायंकाल तक आयोजित योग सत्रों, आध्यात्मिक प्रवचनों, वैदिक अनुष्ठानों और प्रेरणादायक संगीत के साथ महोत्सव का पहला दिन दिव्य और प्रेरणादायक रहा।

सोमवार को प्रातः कालीन सत्र में योगाचार्य दासा दास ने हठ योग, प्राणायाम और ईरान की योगाचार्य आध्या ने पारंपरिक हठ योग, हठ विन्यास का अभ्यास कराया। कैवल्यधाम योग संस्थान की प्राणायाम विशेषज्ञ संध्या दीक्षित ने योग जिज्ञासुओं को प्राणायाम की शक्ति विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया। योगाचार्य सेंसई संदीप देसाई ने ताई-ची फ्लो सत्र में प्रतिभागियों को संतुलन और आंतरिक शांति का अनुभव कराया।

 

मैट से मिशन तक, कर्मयोग के रूप में जीवन जीना इस विषय पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। ईडन गोल्डमैन ने विशेष संवाद सत्र आयोजित किया। डाॅ. साध्वी भगवती सरस्वती, ईशान तिगुनायत, योगाचार्या शिवा रे, आनंद मेहरोत्रा और टॉमी रोसेन आदि ने भी विचार व्यक्त किया। संवाद सत्र में वक्ताओं ने बताया कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह सेवा, करुणा, जागरूकता और जीवन के प्रत्येक क्षण में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग है। दिनभर प्रतिभागियों ने योग की अनेक विधाओं का अनुभव किया, जिनमें मंत्र योग, चक्र बैलेंसिंग विन्यास, विन्यास योग, हृदय-केंद्रित ध्यान सत्र, कुंडलिनी योग तथा योग दर्शन पर गहन चर्चा शामिल रही।

नाद योग और साउंड हीलिंग पर आधारित विशेष सेक्रेड साउंड एक्सपीरियंस में प्रतिभागियों ने मंत्र, संगीत और ध्वनि के माध्यम से गहन ध्यान का अनुभव किया। परमार्थ निकेतन की गंगा आरती के बाद प्रतिभागियों ने भारत की प्राचीन योग परंपरा मल्लखंब का आनंद लिया। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव पूरी मानवता को एक सूत्र में जोड़ने वाला वैश्विक आध्यात्मिक संगम है।

 

योगाचार्यों ने दी प्रतिक्रिया

अमेरिका के योगाचार्य टॉमी रोसेन ने कहा कि एक समय मुझे चिंता होती थी कि मैं महापुरुषों जैसा नहीं बन सकता। तब मुझे यह समझाया गया कि यदि मैं नियमित रूप से अपनी योग साधना करूं और अपने हृदय के केंद्र से जुड़ूं, तो स्वयं स्पष्ट हो जाएगा कि मैं इस संसार की सेवा किस प्रकार सबसे बेहतर ढंग से कर सकता हूं। वही मेरा धर्म बन जाएगा। इंटरनेशनल योग फेस्टिवल में उपस्थित प्रत्येक साधक के पास यह अनमोल अवसर है कि वह यह खोज सके कि हम स्वयं की, अपने परिवार की, अपने समुदाय की और पूरे विश्व की सेवा किस प्रकार कर सकते हैं। शिवा रे ने कहा कि इंटरनेशनल योग फेस्टिवल योगिक ज्ञान और आध्यात्मिक परंपरा का अद्भुत केंद्र है।

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