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नववर्ष का प्रारंभ वैदिक मंत्रों के साथ रौद्रसिद्धि अनुष्ठान में शांति और सद्भाव का आह्वान

नोएडा । सेक्टर 27 स्थित फार्च्यून सभागार में आर्यम इंटरनेशनल फाउंडेशन द्वारा नववर्ष 2026 के उपलक्ष्य में सनातन परंपरा का दिव्य और भव्य रौद्रसिद्धि गुरुकृपा अनुष्ठान महोत्सव आयोजित किया गया। देश के विभिन्न प्रांतों के साथ-साथ विदेशों से भी श्रद्धालु इसमें शामिल हुए। समस्त कार्यक्रम ट्रस्ट के प्रमुख जगदगुरु प्रो. पुष्पेंद्र कुमार आर्यम के सानिध्य में संपन्न हुआ। इस दौरान वैदिक मंत्रों से माहौल धर्ममय हो गया।

विश्व भर में नववर्ष को एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। अधिकांश लोग जहां नाच-गाने और दूषित खान पान में लीन होते हैं। वहीं आर्यम गुरुदेव नववर्ष को धार्मिक उत्सव के रूप में स्थापित कर रहे हैं। नववर्ष का आरंभ भारतीय परंपरा में केवल तिथि परिवर्तन नहीं माना जाता। इसे एक आध्यात्मिक पुनरारंभ समझा जाता है। भले ही यह आंग्लिक नववर्ष हो, किंतु इसका उत्सव सनातन जीवन की निरंतरता का प्रतीक है। यही कारण है कि हजारों शाखाएं सनातन के विशाल वृक्ष का हिस्सा बनी हुई हैं।

वैदिक अनुष्ठान, हवन-यज्ञ, पुष्पार्चन और मंत्रोच्चार के माध्यम से प्रकृति, देवताओं, मनुष्य और अन्य प्राणियों के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया जाता है। आर्यम अनुष्ठानों का उद्देश्य पवित्रता, अनुशासन और सकारात्मक संकल्पों का विकास है, ताकि व्यक्ति ईश्वरीय ऊर्जा से जुड़ सके और अपने कर्तव्यों के प्रति अधिक सजग बने।

गुरुदेव आर्यम का कहना है कि वैदिक आराधना केवल व्यक्तिगत कल्याण तक सीमित नहीं है। यह सामूहिक चेतना को शुद्ध करने का भी माध्यम बनती है। उनके अनुसार मंत्र, परमात्मा तक पहुंचने का अकेला मार्ग नहीं, परंतु ध्वनि-ऊर्जा के रूप में सभी प्राणियों को एक सूत्र में जोड़ देती हैं। जब नववर्ष पर समुदाय मिलकर देवताओं का आह्वान करता है, तब सद्भाव, सहयोग और लोक कल्याण की भावना स्वाभाविक रूप से बढ़ती है। समष्टि के विकास से पूर्व व्यष्टि के भीतर स्थिरता और करुणा का विकास होता है। परिणामस्वरूप परिवार, समाज और राष्ट्र, तीनों स्तरों पर नैतिक शक्ति सुदृढ़ होती है।

नववर्ष पर संपन्न “रौद्रसिद्धि गुरुकृपा अनुष्ठान” अपने नाम में ही गहरा आध्यात्मिक संकेत समेटे हुए है। इस अनुष्ठान का नामकरण स्वयं गुरुदेव आर्यम ने किया। “रौद्र” भगवान शिव की परिवर्तनकारी शक्ति का प्रतीक है, जो अज्ञान और नकारात्मकता का नाश करती है और नए सृजन का मार्ग खोलती है। “सिद्धि” जीवन में अध्यात्म, चरित्र-निष्ठा और कर्तव्यबोध की प्राप्ति की ओर प्रेरित करती है। “गुरुकृपा” गुरु के आशीर्वाद का द्योतक है, जो साधना को दिशा देता है और अनुशासन को स्थिर बनाता है।

हर वर्ष जगदगुरु आर्यम यह संदेश देते हैं कि नववर्ष मात्र उत्सव न रहे। यह आत्मशुद्धि, लोक कल्याण और वैश्विक सद्भाव का संकल्प बने। “तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु” का सूत्र, वैदिक मंत्रों की ध्वनि और गुरु-आशीष मिलकर मानवता को शांति और कल्याण की ओर आगे बढ़ाएं, यही इस अनुष्ठान की मूल भावना है। समारोह में आयरलैंड, लंदन, सऊदी अरब, दुबई, नेपाल तथा भारत के लगभग सभी प्रांतों से 300 आर्यम भक्तों ने सहभागिता करके नववर्ष में आध्यात्मिक जीवन के प्रति संकल्प को दोहराया।

ट्रस्ट की अधिशासी प्रवक्ता मां यामिनी श्री ने बताया कि जगद्गुरु आर्यम का उद्देश्य विश्व भर को धर्म और पुरुषार्थ की सीख देना है। ज्ञातव्य है कि आज गुरुदेव आर्यम के विश्व भर में शिष्य हैं और वे उनके लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। उनकी देशनाओं से आज लाखों लोगों का जीवन रूपांतरित हो रहा है और वे सभी समग्रता के साथ अपने जीवन में आगे बढ़ रहे हैं।

गुरुदेव लोगों को यह सिखाते हैं कि आध्यात्मिकता और कर्तव्यपालन एक-दूसरे के पूरक हैं। उनका संदेश है कि साधना केवल मंदिरों तक सीमित न रहे, बल्कि व्यवहार और सेवा में दिखाई दे। इसी दृष्टि से वे समाज में कल्याणकारी जागृति का अभियान चला रहे हैं। भंडारा कार्ड योजना, मेरा पौधा-मेरा जीवन – मेरे संग और निःशुल्क चिकित्सा अभियान उनके द्वारा कुछ समाज उद्धारक अभियान हैं। उनके मार्गदर्शन और सानिध्य में युवा पीढ़ी भी अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिकता के साथ संतुलन बनाना सीख रही है।

इस कार्यक्रम में सुनील आर्यम, हर्षिता आर्यम, श्वेता जायसवाल, राकेश रघुवंशी, मनजीत गोले, प्रदीप यादव, शालिनी श्री, गौरव स्वामी, उत्कर्ष सिंह, चंद्रपाल शर्मा, अविनाश जायसवाल, भव्या सिंह, प्रीतेश आर्यम, रोहित वेदवान, राजेंद्र कुमार, सोनिया, अजीत, कुंदन, संध्याश्री, जया शर्मा आदि का सहयोग रहा।

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