वाराणसी : हजारों वर्षों से आस्था और अध्यात्म का केंद्र रही काशी आज डिजिटल माध्यम से दुनिया के कोने-कोने तक पहुँच रही है। श्री मंदिर ऐप के माध्यम से अब देश और विदेश में रहने वाले लाखों श्रद्धालु बनारस के प्रमुख और पारंपरिक मंदिरों में पूजा, दर्शन और चढ़ावा अर्पित कर पा रहे हैं। श्री मंदिर ऐप ने वाराणसी के कई महत्वपूर्ण मंदिरों को वैश्विक श्रद्धालुओं से जोड़ा है, जिनमें पिशाच मोचन कुंड, बटुक भैरव मंदिर, आदि काल भैरव, गौरी केदारेश्वर मंदिर और दुर्गा कुंड मंदिर शामिल हैं। इन मंदिरों के माध्यम से अब श्रद्धालु अपनी आस्था को डिजिटल रूप से जीवंत अनुभव कर पा रहे हैं।
अब तक श्री मंदिर ऐप के माध्यम से वाराणसी के विभिन्न मंदिरों में 10 लाख से अधिक श्रद्धालु पूजा और प्रार्थना अर्पित कर चुके हैं, जो इस डिजिटल आस्था मंच पर बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। काशी जैसे ऐतिहासिक शहर में बढ़ते ओवरटूरिज्म की चुनौती को ध्यान में रखते हुए, श्री मंदिर ने तकनीक के जरिए एक संतुलित समाधान प्रस्तुत किया है। ऐप के माध्यम से पूजा और चढ़ावा अर्पित करने से न केवल मंदिरों में भीड़ का दबाव कम होता है, बल्कि श्रद्धालुओं को घर बैठे आध्यात्मिक संतोष भी मिलता है।
इसके साथ ही श्री मंदिर ऐप ने वाराणसी के उन मंदिरों को भी पहचान और मंच दिया है, जो पारंपरिक रूप से कम प्रसिद्ध रहे हैं, लेकिन जिनका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत गहरा है। इस पहल से मंदिरों से जुड़े पुजारी, सेवायत और अन्य स्थानीय व्यवस्थाओं को भी नियमित आर्थिक सहयोग प्राप्त हो रहा है।
यह पहल विशेष रूप से बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए वरदान साबित हो रही है, जो यात्रा करने में असमर्थ होने के बावजूद अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा और चढ़ावा अर्पित कर सकते हैं।
श्री मंदिर के संस्थापक एवं सीईओ प्रशांत सचान ने कहा, “हमारा उद्देश्य काशी की भक्ति को हर श्रद्धालु के द्वार तक पहुँचाना है। तकनीक के माध्यम से हम न केवल ओवरटूरिज्म जैसी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं, बल्कि उन लाखों लोगों को भी आस्था से जोड़ रहे हैं, जो किसी कारणवश मंदिर नहीं आ पाते। श्री मंदिर काशी की आध्यात्मिक विरासत को सहेजते हुए उसे वैश्विक मंच पर ले जाने का प्रयास है।”
दुर्गा कुंड मंदिर के पुजारी विकास गिरी ने कहा, “श्री मंदिर ऐप के माध्यम से श्रद्धालुओं को मंदिर के इतिहास और महिमा की जानकारी मिल पा रही है। जो लोग किसी कारणवश काशी नहीं आ पा रहे हैं, वे भी पूजा और चढ़ावा सेवा का लाभ ले पा रहे हैं। विश्वभर से लोग इससे जुड़ पा रहे हैं, विशेष रूप से बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालु अपनी श्रद्धा सहज रूप से अर्पित कर पा रहे हैं।”
श्री मंदिर ऐप के माध्यम से बनारस आज एक डिजिटल तीर्थ के रूप में उभर रहा है, जहाँ आस्था, परंपरा और तकनीक एक साथ मिलकर श्रद्धालुओं को एक नया अनुभव प्रदान कर रही है।
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