उत्तराखंड

आपदा प्रबंधन सम्मेलन: 57 से ज्यादा देशों के विशेषज्ञ और वैज्ञानिक पहुंचे, सिलक्यारा अभियान को बताया मिसाल

देहरादून में तीन दिवसीय विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन 2025 शुरू हो गया है। सीएम पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भी इसमें शामिल हुए।

यूकॉस्ट की ओर से आयोजित सम्मेलन में केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इतिहास में जब आपदा की बात होगी तो सिलक्यारा एक रेफरेंस होगा। सिलक्यारा की कामयाबी हमेशा मिसाल रहेगी। विश्व स्तर की समिट के लिए उत्तराखंड से बेहतर कुछ नहीं हो सकता। गंगा-यमुना के बीच बसने वाले इस राज्य में आपदाएं भी आती हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2014 में सरकार में आने के बाद उत्तराखंड को एक अलग तवज्जो दी गई है। विकसित देश बनने के लिए हम कई पहलुओं पर काम कर रहे हैं।

एक ओर हिन्द महासागर और दूसरा हिमालय। एरोमा मिशन से 3000 से अधिक स्टार्टअप आज लाखों की कमाई कर रहे हैं। तकनीक समझने की क्षमता वालों को सरकार बाजार तक पहुंचा रही है। ये काम जम्मू कश्मीर से शुरू हुआ था। सीएसआईआर से कहेंगे कि एरोमा मिशन को आगे बढ़ाएं। मुझे कई नौजवान मिले जो नौकरी छोड़कर एग्रो स्टार्टअप की ओर बढ़े हैं।

पिछले एक दशक में हाइड्रो मेट्रोलॉजिकल हेजर्ड में उत्तराखंड में बहुत इजाफा हुआ है। 2013 का केदारनाथ और 2021 का चमोली की आपदा। इससे लैंडस्लाइड बढ़ गई। विश्वभर में जलवायु परिवर्तन हो रहा है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं। ग्लेशियर लेक और फ्रेजइल माउंटेन इको सिस्टम और डी फोरेस्ट्रेशन और मैन मेड। ये सभी आपदा के कारक हैं। 2014 में जम्मू में ऐसी आपदा आई कि सबकुछ बह गया।

जब हम डिजास्टर मैनेजमेंट की बात करते हैं तो हमें देखना होगा कि उसका कारण सभी हैं। नदियों के किनारे निर्माण।

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