Dehradunउत्तराखंड

फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखण्ड के 52 संस्थानों से 200 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

तुलाज़ यूनिवर्सिटी में एक दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित
देहरादून: तुलाज़ यूनिवर्सिटी ने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई), नई दिल्ली के सहयोग से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत बैचलर ऑफ फार्मेसी (बी.फार्मा) के नए पाठ्यक्रम 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर आज यूनिवर्सिटी परिसर में एक दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफदीपी) का आयोजन किया।
कार्यक्रम में उत्तराखंड के विभिन्न फार्मेसी संस्थानों से फैकल्टी सदस्यों, शिक्षाविदों, अकादमिक नेतृत्वकर्ताओं, फार्मेसी विशेषज्ञों और शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. मोंटू कुमार एम. पटेल, फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष जशुभाई हिराभाई चौधरी तथा वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. त्रिप्ता ठाकुर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं एसडीबीआईटी, देहरादून के निदेशक एवं फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया की सेंट्रल काउंसिल के सदस्य डॉ. शिवानंद एम. पाटिल विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
तुलाज़ यूनिवर्सिटी की ओर से सीनियर वाइस प्रेसिडेंट रौनक जैन, डायरेक्टर जनरल सिल्की जैन मारवाह तथा वाइस प्रेसिडेंट टेक्नोलॉजी डॉ. राघव गर्ग भी उद्घाटन समारोह में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. मोंटू कुमार एम. पटेल ने मजबूत शैक्षणिक नींव, दूरदर्शी नेतृत्व और संशोधित पाठ्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि फार्मास्युटिकल शिक्षा का उद्देश्य ऐसे सक्षम और कुशल पेशेवर तैयार करना है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य और समाज के कल्याण में प्रभावी योगदान दे सकें।
वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. त्रिप्ता ठाकुर ने उच्च शिक्षा के बदलते स्वरूप, शैक्षणिक सुधारों तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को साकार करने में विश्वविद्यालयों की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। एफडीपी के तकनीकी सत्रों में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने नए बी.फार्मा पाठ्यक्रम के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के अंतर्गत तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिन्हें डॉ. सरथ चंद्रन, डॉ. वी. के. मौर्य और डॉ. अनूप किशोर ने संबोधित किया। कार्यक्रम में उत्तराखंड के 52 फार्मेसी संस्थानों के फैकल्टी सदस्यों ने भाग लिया। इसमें निजी कॉलेजों, सरकारी कॉलेजों, निजी विश्वविद्यालयों, डीम्ड विश्वविद्यालयों, राज्य सरकारी विश्वविद्यालयों तथा केंद्रीय विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि शामिल रहे। कार्यक्रम में 200 से अधिक प्रतिभागियों की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के दौरान तुलाज़ यूनिवर्सिटी के प्रो वाइस चांसलर डॉ. शैलेन्द्र कुमार तिवारी, डायरेक्टर (अकादमिक्स) डॉ. निशांत सक्सेना, रजिस्ट्रार डॉ. विजय कुमार उपाध्याय, डीन डॉ. योगेश जोशी सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम फार्मेसी शिक्षा में हो रहे बदलावों, नए बी.फार्मा पाठ्यक्रम की आवश्यकताओं तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी शिक्षण व्यवस्था विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।

Advt.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button