उत्तराखंड को रुद्राक्ष की खेती, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने कदम बढ़ाए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में रुद्राक्ष की संगठित और व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने के लिए व्यापक राज्य नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत पर्वतीय क्षेत्रों में रुद्राक्ष उत्पादन बढ़ाने के साथ खेती से लेकर प्रसंस्करण, विपणन और संबंधित उद्योगों तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की योजना है।
यह पहल टिहरी गढ़वाल के विधायक किशोर उपाध्याय के नेतृत्व में नेपाल गए प्रतिनिधिमंडल के अध्ययन के बाद सामने आई है। प्रतिनिधिमंडल में कृषि वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक लेखक डॉ. रमेश सिंह पाल और रुद्राक्ष विशेषज्ञ प्रिंस अग्रवाल शामिल थे। दल ने नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों में रुद्राक्ष की खेती, फसल प्रबंधन, कटाई के बाद प्रसंस्करण, विपणन व्यवस्था, मिट्टी की विशेषताओं और किसान आधारित उत्पादन मॉडल का अध्ययन किया।
200 पृष्ठों की रिपोर्ट में सुझाई रणनीति
क्षेत्रीय अध्ययन और वैज्ञानिक आकलन के आधार पर प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड में रुद्राक्ष उत्पादन की संभावनाओं को लेकर करीब 200 पृष्ठों की तकनीकी रिपोर्ट तैयार की। इसमें रुद्राक्ष की खेती के विस्तार और विकास के लिए व्यापक रणनीतिक रोडमैप भी शामिल है। यह रिपोर्ट नौ जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपी गई थी।
रिपोर्ट की सिफारिशों पर विचार के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर 31 अगस्त को उत्तराखंड शासन के उप सचिव की ओर से उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग को रुद्राक्ष की संगठित खेती के विकास के लिए राज्य नीति तैयार करने के संबंध में पत्र जारी किया गया।
आयात पर निर्भरता घटाने की तैयारी
रुद्राक्ष के घरेलू बाजार में भारत की आयात पर निर्भरता काफी अधिक है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश में खपत होने वाले 95 प्रतिशत से अधिक रुद्राक्ष का आयात नेपाल और इंडोनेशिया से किया जाता है। वर्ष 2025 में दोनों देशों से रुद्राक्ष के आयात का अनुमानित मूल्य करीब 20.14 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। ऐसे में प्रदेश में रुद्राक्ष की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देकर घरेलू उत्पादन बढ़ाने की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया जा रहा है।
किसानों की आय और पर्यटन को मिलेगा आधार
प्रस्तावित नीति के तहत रुद्राक्ष को व्यावसायिक रूप से लाभकारी फसल के रूप में विकसित करने की योजना है। इससे पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों को टिकाऊ और अपेक्षाकृत उच्च मूल्य वाली फसल के माध्यम से आय के नए अवसर मिल सकते हैं। साथ ही रुद्राक्ष आधारित प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन से ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
रुद्राक्ष उत्पादन को उत्तराखंड की आध्यात्मिक और वेलनेस पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ने की भी परिकल्पना की गई है। इससे खेती के साथ-साथ संबंधित उद्योग और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
‘हिमालयन रुद्राक्ष हब’ बनाने की परिकल्पना
विधायक किशोर उपाध्याय, डॉ. रमेश सिंह पाल और प्रिंस अग्रवाल ने प्रस्तावित नीति पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण, उपयुक्त क्षेत्रों का चयन और सुव्यवस्थित नीति के माध्यम से उत्तराखंड को रुद्राक्ष उत्पादन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख केंद्र बनाया जा सकता है।
पहल की व्यापक परिकल्पना उत्तराखंड को ‘हिमालयन रुद्राक्ष हब’ के रूप में विकसित करने की है। इसके जरिए रुद्राक्ष के आयात पर निर्भरता कम करने के साथ पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रामीण उद्यमिता, किसानों की आय, आध्यात्मिक पर्यटन और टिकाऊ आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है।




