उत्तराखंड

नंदा की चौकी पुल एप्रोच रोड मामला, हिमालयन कंस्ट्रक्शन कंपनी बैन, ठेकेदार पर भी एक्शन

नंदा की चौकी के पास टौंस नदी पर बने पुल की एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने के मामले में PWD ने ठेकेदार कंपनी पर बड़ी कार्रवाई की है. विभाग ने हिमालयन कंस्ट्रक्शन को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए अग्रिम आदेशों तक लोक निर्माण विभाग की निविदा प्रक्रिया में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया है.

 

भारी बारिश और फ्लैश फ्लड से क्षतिग्रस्त हुई एप्रोच रोड: देहरादून-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-72 पर टौंस नदी के किमी 143 में उत्तरांचल यूनिवर्सिटी के समीप पहले से क्षतिग्रस्त पुल के पुनर्निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण का काम कराया जा रहा था. यह कार्य अनुबंध संख्या 36/SE-09/2025-26, दिनांक 31 जनवरी 2026 के तहत मैसर्स हिमालयन कंस्ट्रक्शन, 250 सारथी विहार, देहरादून को दिया गया था. 28 जुलाई 2026 की सुबह हुई भारी बारिश और फ्लैश फ्लड के बाद पुल की एप्रोच रोड को नुकसान पहुंचा. विभागीय जांच में सामने आया कि Upstream Protection Wall के नीचे Scouring होने के कारण एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त हुई.

शासन ने दिए थे जांच के निर्देश: मामले को गंभीरता से लेते हुए लोक निर्माण विभाग के सचिव ने 28 जुलाई को मुख्य अभियंता, क्षेत्रीय कार्यालय लोक निर्माण विभाग, देहरादून को मामले की प्राथमिक जांच करने के निर्देश दिए थे. शासन ने जांच में सामने आए तथ्यों और अभिलेखीय साक्ष्यों के साथ रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा था. इसके बाद मुख्य अभियंता की ओर से 3 अगस्त 2026 को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई. रिपोर्ट में पुल की एप्रोच रोड को हुए नुकसान का कारण Heavy Scouring बताया गया.

जांच के दौरान मौके पर Scour Depth का Assessment नहीं हो पाया. इसके लिए जांच अधिकारी ने Ground Penetration Radar (GPR) और Electrical Resistivity Test (ERT) कराने की जरूरत बताई है, ताकि स्कॉर की वास्तविक गहराई और स्थिति का वैज्ञानिक तरीके से आकलन किया जा सके.

 

जांच पूरी होने तक कंपनी पर रोक: प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर PWD ने मैसर्स हिमालयन कंस्ट्रक्शन के खिलाफ कार्रवाई की है. विभाग ने कंपनी का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. साथ ही, अग्रिम आदेशों तक कंपनी को लोक निर्माण विभाग, उत्तराखंड की निविदा प्रक्रिया में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है. पुल की एप्रोच रोड को हुए नुकसान के मामले में अब कार्रवाई सिर्फ तकनीकी जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्माण कार्य करने वाली कंपनी पर भी विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई है. आगे GPR और ERT के जरिए स्कॉर की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा.

 

रुचि भट्ट ने कंपनी में हिस्सेदारी स्वीकार की: मामले में हिमालयन कंस्ट्रक्शन में हिस्सेदार रुचि भट्ट की प्रतिक्रिया भी सामने आई है. रुचि भट्ट ने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी होने की बात स्वीकार की है. उन्होंने कहा हिमालयन कंस्ट्रक्शन में उनकी हिस्सेदारी है. कंपनी से जुड़े मामले में जो भी जिम्मेदारी बनती है, वह उससे पीछे नहीं हटेंगी.

 

रुचि भट्ट ने कहा सरकार और विभाग की ओर से मामले में जो भी कार्रवाई की जाएगी, वह उसके लिए तैयार हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपनी कंपनी के लिए स्वयं जिम्मेदार हैं. सरकार के निर्णय का सामना करने को तैयार हैं. उनके मुताबिक, जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे और सरकार की ओर से जो भी निर्णय लिया जाएगा, उसका पालन किया जाएगा. इस पूरे मामले में अब तकनीकी जांच की रिपोर्ट अहम होगी. GPR और ERT जांच के बाद स्कॉर की वास्तविक गहराई और पुल की संरचना पर उसके प्रभाव का आकलन किया जाएगा. जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है.

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